एक अजीब सी दास्तां है ये  ये किसका आसमान है ये  टिम-टिमाते हैं तारे यहाँ  चाँद क्यों परेशान है ये  ढूंढ़ता है कोई खुद को कहीं  दुनिया उसकी कभी थी ही नहीं अरमानों के पुल जलाके शायद बचे निशान कहीं रात का समुन्दर ले आता है जाने कैसे-कैसे याद कई तैर चलो तुम बादलों पर मिल जाए शायद वो फिर वहीँ गूंजता सा है कुछ पहाड़ों में उसकी आवाज़ फिर है नयी भूलता भी तो कैसे मैं थामा था उसने यहीं !